भारत में ब्लड कैंसर के इलाज की नई तैयारी, भारत बायोटेक की सहयोगी कंपनी ने वेजेन बायो से मिलाया हाथ, 2028 तक CAR-T थेरेपी लाने का लक्ष्य
भारत में ब्लड कैंसर के इलाज को आगे बढ़ाने के लिए भारत बायोटेक की सहायक कंपनी न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स और हैदराबाद की वेजेन बायो ने साझेदारी की है। दोनों कंपनियां मल्टीपल मायलोमा के इलाज के लिए VL-2511 नाम की CAR-T थेरेपी विकसित करने पर काम करेंगी। इस थेरेपी को कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद BCMA और CD19 प्रोटीन को निशाना बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। साझेदारी के तहत वेजेन बायो तकनीक उपलब्ध कराएगी, जबकि न्यूसेलियन इसके निर्माण और उत्पादन क्षमता विकसित करने पर काम करेगी। कंपनियों ने 2028 तक इसे बाजार में लाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, भारत में इसके इस्तेमाल से पहले आगे की जांच, क्लिनिकल ट्रायल और जरूरी नियामकीय मंजूरियां महत्वपूर्ण होंगी।
भारत में ब्लड कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में नई पहल हुई है। भारत बायोटेक की सहायक कंपनी न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स ने हैदराबाद की वेजेन बायो के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां मल्टीपल मायलोमा नाम के ब्लड कैंसर के इलाज के लिए VL-2511 नाम की CAR-T थेरेपी विकसित करने पर काम करेंगी। इस साझेदारी का उद्देश्य भारत में इस तरह के इलाज को विकसित करने और उसका उत्पादन बढ़ाने की क्षमता तैयार करना है। कंपनियों ने 2028 तक इस थेरेपी को बाजार में लाने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, इसके लिए जरूरी जांच और क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे अहम होंगे।
क्या है मल्टीपल मायलोमा, जिससे जूझते हैं मरीज?
मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो प्लाज्मा कोशिकाओं को प्रभावित करता है। ये कोशिकाएं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं और सामान्य रूप से संक्रमण से लड़ने में मदद करने वाली एंटीबॉडी बनाती हैं। इस बीमारी में असामान्य प्लाज्मा कोशिकाएं बोन मैरो यानी हड्डियों के भीतर मौजूद खून बनाने वाले ऊतक में जमा होने लगती हैं। इसका असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। मरीजों को हड्डियों में दर्द, थकान, खून की कमी, बार-बार संक्रमण और किडनी से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कुछ मरीजों में इलाज के बाद भी बीमारी दोबारा लौट आती है या मौजूदा उपचार से उसे लंबे समय तक नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में नई दवाओं और उन्नत उपचार पद्धतियों की जरूरत बनी रहती है।
क्या है CAR-T थेरेपी और कैसे करती है काम?
CAR-T एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी है, जिसमें मरीज की अपनी टी-सेल्स को कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। टी-सेल्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की वे कोशिकाएं हैं, जो हानिकारक कोशिकाओं की पहचान करने और उनसे लड़ने में भूमिका निभाती हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज के खून से टी-सेल्स निकाली जाती हैं। इसके बाद प्रयोगशाला में उनकी आनुवंशिक संरचना में बदलाव करके उनमें ऐसी क्षमता विकसित की जाती है, जिससे वे कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद खास प्रोटीन की पहचान कर सकें। तैयार की गई कोशिकाओं को फिर मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है, जहां वे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करने में मदद करती हैं। हालांकि, CAR-T थेरेपी सामान्य उपचार नहीं है। इसके कुछ गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं और मरीज की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञों की निगरानी में इसका इस्तेमाल किया जाता है।
VL-2511 थेरेपी में क्या है खास?
वेजेन बायो की VL-2511 थेरेपी को कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद BCMA और CD19 नाम के प्रोटीन को निशाना बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस तरह के उपचार में लक्ष्य यह होता है कि संशोधित टी-सेल्स कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उनके खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित कर सकें। इस थेरेपी की खास बात यह है कि इसमें दो अलग-अलग प्रोटीन को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई गई है। इसका उद्देश्य मल्टीपल मायलोमा से जुड़ी कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने की क्षमता विकसित करना है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता और सुरक्षा का पता आगे होने वाली जांच और क्लिनिकल ट्रायल से ही चलेगा। फिलहाल VL-2511 विकास के चरण में है। इसलिए इसे मरीजों के लिए उपलब्ध स्थापित उपचार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
न्यूसेलियन और वेजेन बायो की क्या होगी भूमिका?
इस साझेदारी के तहत वेजेन बायो VL-2511 से जुड़ी तकनीक उपलब्ध कराएगी, जबकि न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स इसके निर्माण की प्रक्रिया विकसित करने पर काम करेगी। कंपनी हैदराबाद स्थित अपनी विशेष सुविधा का इस्तेमाल थेरेपी के उत्पादन और भविष्य में बड़े स्तर पर निर्माण की क्षमता विकसित करने के लिए करेगी। इस तरह की साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य उन्नत सेल थेरेपी के विकास के साथ-साथ उसके निर्माण से जुड़ी तकनीकी क्षमता को भारत में मजबूत करना है। यदि परियोजना तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो इससे देश में CAR-T जैसे जटिल उपचारों के उत्पादन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
2028 तक बाजार में लाने का लक्ष्य, कीमत पर भी नजर
कंपनियों ने VL-2511 को 2028 तक बाजार में लाने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए भारत में आगे की जांच और क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। किसी भी नई कैंसर थेरेपी को मरीजों के लिए उपलब्ध कराने से पहले उसकी सुरक्षा, प्रभावशीलता और नियामकीय मंजूरी से जुड़ी आवश्यकताएं पूरी करनी होती हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, इस थेरेपी पर चीन में क्लिनिकल विकास का काम हो चुका है और अमेरिका में भी इसे विकसित किया जा रहा है। भारत में इसके आगे के विकास और परीक्षण की योजना है। कंपनियों की कोशिश इसे किफायती बनाने की भी है, क्योंकि CAR-T जैसी उन्नत सेल थेरेपी के निर्माण और उपचार की प्रक्रिया जटिल होती है। हालांकि, इसकी अंतिम कीमत, भारत में उपलब्धता और मरीजों के लिए वास्तविक लाभ के बारे में अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
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