बिस्किट में जानवरों का चोकर, डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा से बन रहा दूध, किशमिश में भी तय सीमा से ज्यादा मिले कीटनाशक के अवशेष, FSSAI ने शुरू की कानूनी कार्रवाई

FSSAI की जांच में तीन कंपनियों के खाद्य उत्पादों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली सूर्या फूड एंड एग्रो के प्लांट में इंसानों के खाने के लिए अनुपयुक्त मवेशियों के चारे वाले चोकर के इस्तेमाल और स्वच्छता संबंधी कमियां मिलने की बात सामने आई। डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध की जांच में पहले फैट की मात्रा तय मानकों से कम मिली, जबकि रेफरल लैब की रिपोर्ट में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा की मौजूदगी की बात कही गई।

Oct 17, 2026 - 13:39
Oct 17, 2026 - 13:44
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बिस्किट में जानवरों का चोकर, डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा से बन रहा दूध, किशमिश में भी तय सीमा से ज्यादा मिले कीटनाशक के अवशेष, FSSAI ने शुरू की कानूनी कार्रवाई

खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की जांच में तीन कंपनियों के उत्पादों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली सूर्या फूड एंड एग्रो, डोडला डेयरी और UEIR ऑर्गेनिक फूड्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। जांच में बिस्किट में इंसानों के खाने के लिए अनुपयुक्त मवेशियों के चोकर के इस्तेमाल, फुल क्रीम दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा की मौजूदगी तथा पीली किशमिश में तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष मिलने की बात सामने आई है। FSSAI ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इन मामलों में कार्रवाई की जानकारी दी है।

प्रियागोल्ड बिस्किट में मवेशियों के चारे वाला चोकर मिला
FSSAI को प्रियागोल्ड बिस्किट की गुणवत्ता को लेकर एक ग्राहक से शिकायत मिली थी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा टीम ने बिस्किट बनाने वाली कंपनी सूर्या फूड एंड एग्रो के प्लांट का निरीक्षण किया। जांच में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी कई कमियां सामने आईं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी बिस्किट में फाइबर का स्रोत बढ़ाने के लिए जिस चोकर का इस्तेमाल कर रही थी, वह इंसानों के खाने के लिए तैयार नहीं किया गया था। यह चोकर मवेशियों के चारे के लिए था। इसके अलावा प्लांट में साफ-सफाई, कीट नियंत्रण, कर्मचारियों की स्वच्छता और खाद्य सामग्री के रखरखाव में भी अनियमितताएं पाई गईं। FSSAI ने पहले कंपनी का लाइसेंस निलंबित किया था। अब मामले में अदालत में मुकदमा चलाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। खाद्य सामग्री में फफूंद या मायकोटॉक्सिन की मौजूदगी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती है। हालांकि, चोकर के इस्तेमाल से किसी खास बीमारी या संक्रमण का खतरा कितना है, यह उसकी गुणवत्ता, दूषित होने की स्थिति और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है।

डोडला डेयरी के दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा की पुष्टि
दूसरा मामला डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध से जुड़ा है। FSSAI की टीम ने जांच के लिए दूध का सैंपल लिया था। शुरुआती जांच में इसमें फैट की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई, जिसके आधार पर इसे घटिया गुणवत्ता यानी सब-स्टैंडर्ड घोषित किया गया। कंपनी ने इस निष्कर्ष के खिलाफ अपील की। इसके बाद सैंपल को रेफरल फूड लैबोरेटरी भेजा गया। वहां की जांच में दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा की मौजूदगी सामने आने की बात कही गई। इसके बाद दूध को केवल घटिया गुणवत्ता वाला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित माना गया। लैब रिपोर्ट के आधार पर डोडला डेयरी और निर्माण व मार्केटिंग से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है। डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा जैसे पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इनसे मुंह, गले और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। कास्टिक सोडा एक संक्षारक रसायन है, जो संपर्क या सेवन की मात्रा के आधार पर गंभीर चोट पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति को कितना नुकसान होगा, यह पदार्थ की मात्रा और संपर्क की स्थिति पर निर्भर करता है।

ऑर्गेनिक किशमिश में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक अवशेष
तीसरी कार्रवाई UEIR ऑर्गेनिक फूड्स के खिलाफ की गई है। FSSAI ने कंपनी के येलो रेजिन्स यानी पीली किशमिश का सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में किशमिश में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। जैविक यानी ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए भी खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है। यदि किसी उत्पाद में कीटनाशक अवशेष तय मानकों से अधिक मिलते हैं, तो यह नियामकीय कार्रवाई का आधार बन सकता है। इस मामले में FSSAI ने कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कीटनाशक का नाम और उसकी वास्तविक मात्रा स्पष्ट नहीं है, इसलिए उसके आधार पर किसी खास स्वास्थ्य प्रभाव का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। कुछ कीटनाशकों के अधिक या लंबे समय तक संपर्क से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा रसायन मौजूद है, उसकी मात्रा कितनी है और व्यक्ति के शरीर में उसका कितना संपर्क हुआ है।

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत क्या हो सकती है कार्रवाई?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षा, निर्माण, भंडारण और बिक्री के लिए नियम तय किए गए हैं। इन नियमों का उल्लंघन होने पर मामले की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। असुरक्षित खाद्य पदार्थों से जुड़े मामलों में कानून के तहत अभियोजन और दोष सिद्ध होने पर सजा का भी प्रावधान है। किसी खाद्य उत्पाद को घटिया गुणवत्ता वाला घोषित किया जाना और उसे स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया जाना अलग-अलग कानूनी श्रेणियां हैं। कार्रवाई और सजा का निर्धारण संबंधित जांच, लागू कानूनी प्रावधानों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है। FSSAI की इन कार्रवाइयों ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। बिस्किट, दूध और किशमिश जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों की जांच में सामने आई गड़बड़ियां बताती हैं कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना कितना जरूरी है।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content