बच्चों के लिए इंटरनेट बैन करना बेतुका, सुरक्षा के साथ आजादी भी जरूरी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऑनलाइन खतरों से बचना सिखाएं

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल, ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल आजादी को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें ऑनलाइन खतरों की पहचान करना और सुरक्षित तरीके से इंटरनेट इस्तेमाल करना सिखाना जरूरी है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को हटाने और उसके दोबारा प्रसार को रोकने के लिए नेशनल डेटाबेस बनाने, सोशल मीडिया कंपनियों की रिपोर्टिंग व्यवस्था मजबूत करने और स्कूलों में ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा शामिल करने के निर्देश दिए हैं। 

Oct 17, 2026 - 13:25
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बच्चों के लिए इंटरनेट बैन करना बेतुका, सुरक्षा के साथ आजादी भी जरूरी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऑनलाइन खतरों से बचना सिखाएं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल हर व्यक्ति, यहां तक कि बच्चों के लिए भी मौलिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के नाम पर इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना सही समाधान नहीं है। दालत ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं। बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के साथ डिजिटल दुनिया तक उनकी पहुंच भी सुनिश्चित करनी होगी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को इंटरनेट से हटाने और उसके दोबारा प्रसार को रोकने के मामले में ये टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री मौजूद होने के कारण बच्चों के लिए पूरी दुनिया को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। ऐसी पाबंदियां उन्हें कम सुरक्षित वेबसाइटों और प्लेटफॉर्म की ओर धकेल सकती हैं। ऑनलाइन धमकी या शोषण झेलने वाले बच्चे शिकायत करने से भी डर सकते हैं।

बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट का बनेगा नेशनल डेटाबेस
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े प्रमाणित कंटेंट की पहचान करने और उसके दोबारा प्रसार को रोकने के लिए नेशनल डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया है। इसमें असली फोटो और वीडियो रखने के बजाय उनकी डिजिटल पहचान यानी हैश और उन वेबसाइटों के लिंक दर्ज किए जाएंगे, जहां संबंधित सामग्री मौजूद है। इसे मौजूदा सहयोग पोर्टल पर बनाया जा सकता है या इसके लिए अलग व्यवस्था तैयार की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी सामग्री को पहचानना है, ताकि उसे हटाने के बाद किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर दोबारा अपलोड किए जाने पर भी पकड़ा जा सके। सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट का मिलान इस डेटाबेस से कर सकेंगी।

तीन विशेषज्ञों की जांच के बाद ही डेटाबेस में दर्ज होगी सामग्री
कोर्ट ने कहा कि किसी सामग्री को डेटाबेस में शामिल करने से पहले उसकी जांच जरूरी होगी। कम से कम तीन प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से यह तय करेंगे कि संबंधित सामग्री बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी है या नहीं। शुरुआती स्तर पर जांच के लिए सॉफ्टवेयर की मदद भी ली जा सकती है। डेटाबेस में दर्ज जानकारी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जांच का रिकॉर्ड रखा जाएगा। यह भी दर्ज होगा कि डेटाबेस तक किसने पहुंच बनाई। समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट किया जाएगा और गलत तरीके से दर्ज सामग्री को हटाने के साथ उसके खिलाफ शिकायत करने की व्यवस्था भी बनानी होगी।

सोशल मीडिया कंपनियों को दो घंटे में पुलिस को देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में रिपोर्टिंग की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। दिए गए निर्देशों के तहत कंपनियों को निर्धारित परिस्थितियों में दो घंटे के भीतर पुलिस को रिपोर्ट देनी होगी। इसका मकसद ऐसे मामलों में कार्रवाई में देरी रोकना और संबंधित सामग्री के प्रसार पर जल्द नियंत्रण करना है। अदालत के निर्देशों के अनुसार, केवल एक बार कंटेंट हटाना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे समान सामग्री दोबारा अपलोड होने पर उसकी पहचान हो सके और उस पर कार्रवाई की जा सके।

स्कूलों में बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा की पढ़ाई कराई जाएगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट पर सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ तकनीकी उपाय काफी नहीं हैं। उन्हें यह भी सिखाना जरूरी है कि ऑनलाइन खतरों को कैसे पहचाना जाए, निजी जानकारी कैसे सुरक्षित रखी जाए और गलत व्यवहार का सामना होने पर मदद कैसे मांगी जाए। कोर्ट ने बच्चों की उम्र के अनुसार सहमति, स्वस्थ रिश्तों, सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श, ऑनलाइन शोषण और उसकी शिकायत करने के तरीकों की जानकारी देने पर जोर दिया। इसके लिए NCERT और राज्य की शैक्षिक संस्थाओं को बाल मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों और अभिभावकों के विशेषज्ञों की मदद से पढ़ाई की सामग्री तैयार करने को कहा गया है। इसमें इंटरनेट पर सुरक्षित व्यवहार और उम्र के अनुरूप यौन शिक्षा को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि बच्चे ऑनलाइन जोखिमों को समझ सकें और जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद लोगों से सहायता मांग सकें।

पेड और सब्सक्रिप्शन वाली सेवाओं की भी होगी जांच
अदालत ने पेड और सब्सक्रिप्शन आधारित ऑनलाइन सेवाओं की निगरानी मजबूत करने को कहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन सेवाओं के जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी या अन्य प्रतिबंधित सामग्री दिखाई न जाए और न ही उसका प्रसार हो। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बात पर विचार करने को भी कहा कि ऐसी सामग्री के प्रसार से कमाई गई रकम को जब्त करके वापस लिया जा सकता है या नहीं। इस पहल का जोर केवल आपत्तिजनक कंटेंट हटाने पर नहीं, बल्कि उसके प्रसार से होने वाले आर्थिक लाभ पर भी कार्रवाई की संभावना तलाशने पर है।

केंद्र सरकार को 10 दिसंबर तक देनी होगी प्रगति रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देशों को लागू करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं तैयार करने को कहा है। जरूरत पड़ने पर आईटी कानून और संबंधित नियमों में बदलाव पर भी विचार करना होगा। सरकार को हलफनामा दाखिल कर अदालत को बताना होगा कि निर्देशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का मुख्य संदेश यह है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। जरूरी है कि उन्हें डिजिटल दुनिया का सुरक्षित इस्तेमाल करना सिखाया जाए और साथ ही ऑनलाइन शोषण करने वालों तथा ऐसी सामग्री फैलाने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था बनाई जाए।

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Sushant Pratap Singh Sushant Pratap Singh is an Indian content creator, video producer, and media professional known for creating political explainer videos, digital journalism content, and social media campaigns. He has worked with UP News Network and specializes in video production, content writing, and social media management. Sushant Pratap Singh began his media career as a content creator and video producer associated with UP News Network. During his professional journey, he worked on political and social explainer content, digital journalism, and social media engagement. He has experience in producing and editing news videos, writing articles for digital platforms, and managing online audience engagement through social media strategies. His work also includes anchoring, on-camera presentation, and graphic design for digital media content. Skills-: Content Writing and Article Writing | Social Media Management | Anchoring and Presentation | Video Editing using Adobe Premiere Pro | Video Production | Graphic Design using Canva | Political and Social Explainer Content