राम नवमी पर जानिए कैसा था भगवान श्रीराम का दिव्य स्वरूप, हनुमान जी ने किया था वर्णन
राम नवमी के अवसर पर हनुमान जी द्वारा वर्णित भगवान राम के दिव्य स्वरूप के बारे में जानें। विस्तृत हिंदी समाचार लेख पढ़ें।
आज पूरे देश में राम नवमी का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन अयोध्या के राजा दशरथ की रानी कौशल्या के गर्भ से भगवान राम का जन्म हुआ था। इस खास अवसर पर भक्त भगवान के स्वरूप और उनके गुणों को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। ऐसे में हनुमान जी द्वारा किए गए श्रीराम के स्वरूप का वर्णन बेहद खास माना जाता है।
हनुमान जी ने बताया प्रभु श्रीराम का स्वरूप
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब हनुमान जी माता सीता को अशोक वाटिका में मिले थे, तब उन्होंने भगवान श्रीराम के रूप का विस्तार से वर्णन किया था। उन्होंने बताया कि भगवान राम के कंधे बहुत चौड़े और भुजाएं लंबी थीं। उनकी गर्दन शंख के समान सुंदर थी और उनके चेहरे पर आकर्षण झलकता था। उनकी आंखों के कोनों में हल्की लालिमा थी, जो वीरता का प्रतीक मानी जाती है।
शरीर की बनावट और रंग का वर्णन
हनुमान जी के अनुसार, भगवान राम की वाणी बहुत गंभीर और प्रभावशाली थी। उनका शरीर संतुलित और मजबूत था। उनका रंग सांवला था, जो देखने में बहुत ही सुंदर लगता था। उनके शरीर का हर अंग एकदम संतुलित था, जिसे देखकर लोगों को शांति और सुकून मिलता था।
बल, शक्ति और विशेष लक्षण
हनुमान जी ने बताया कि श्रीराम के वक्षस्थल, कलाई और मुट्ठियां बहुत मजबूत थीं। उनकी भौहें लंबी और सुडौल थीं। उनके शरीर के कई हिस्सों पर तीन-तीन रेखाएं थीं, जो उनके विशेष गुणों को दर्शाती हैं। उनके सिर पर बालों में तीन चक्र (भंवर) भी थे, जो उन्हें अलग पहचान देते थे।
ऊंचाई और चाल का वर्णन
भगवान राम की ऊंचाई लगभग 6 फीट बताई गई है। उनके शरीर के 14 अंग जैसे आंखें, कान, घुटने आदि पूरी तरह समान थे। उनकी चाल में सिंह, बाघ, हाथी और नंदी जैसी ताकत झलकती थी। उनके दांत बहुत सुंदर थे और उनकी मुस्कान मन को मोह लेने वाली थी।
कमल जैसे कोमल अंग और दिव्य गुण
हनुमान जी ने बताया कि भगवान राम के कई अंग जैसे आंखें, होंठ, हाथ और पैर कमल के समान कोमल और गुलाबी थे। उनका सिर, ललाट, भुजाएं और हृदय विशाल थे। उनके भीतर यश, श्री और कीर्ति जैसे गुण मौजूद थे। वे धर्म के अवतार माने जाते हैं।
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