गाजीपुर में मासूम के साथ दरिंदगी, इलाज के लिए 8-9 घंटे भटकती रही बच्ची, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
गाजीपुर में 6 वर्षीय पीड़ित को इलाज में देरी का सामना करना पड़ा, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और लापरवाही पर गंभीर सवाल उठते हैं।
गाजीपुर से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने मानवता और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवरात्रि की अष्टमी के दिन 6 साल की एक मासूम बच्ची दरिंदगी का शिकार हो गई। परिजनों ने जब उसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, तो आरोप है कि उसे तुरंत उपचार देने के बजाय एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा जाता रहा। करीब 8 से 9 घंटे तक बच्ची को इलाज के लिए भटकना पड़ा, जिससे परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इलाज के लिए भटकती रही मासूम
घटना के बाद परिजन बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां इलाज के बजाय डॉक्टरों और प्रशासन ने नियम और रोस्टर का हवाला दिया। इस दौरान मासूम दर्द से तड़पती रही, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। करीब 8-9 घंटे तक सुनवाई न होने पर परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने अस्पताल में धरना शुरू कर दिया।
CMO और मेडिकल कॉलेज में टकराव
मामला बढ़ने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील पांडे मौके पर पहुंचे। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और शासन को पत्र लिखने की बात कही। इसके जवाब में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आनंद मिश्रा ने प्रेस वार्ता कर अपनी सफाई दी, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
ड्यूटी पर नहीं थे डॉक्टर
प्रिंसिपल डॉ. आनंद मिश्रा के अनुसार, मेडिको-लीगल जांच के लिए ट्रामा सेंटर में डॉ. पल्लई राय और डॉ. मनोरम यादव की ड्यूटी लगी थी, लेकिन घटना के समय दोनों डॉक्टर मौजूद नहीं थे। उन्होंने बताया कि बच्ची को पहले स्थिर किया गया, लेकिन डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण मेडिकल जांच घटना के लगभग 15 घंटे बाद दोपहर 3 बजे हो सकी।
जिम्मेदारी को लेकर उठे सवाल
प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि मेडिको-लीगल करने वाले अधिकारी सीधे CMO के नियंत्रण में आते हैं, इसलिए उनकी अनुपस्थिति की जिम्मेदारी भी वहीं तय होती है। इस बयान के बाद CMO और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
संवेदनहीनता पर गुस्सा
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जब अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे थे, तब मासूम बच्ची इलाज और न्याय के लिए तड़पती रही। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
