LPG संकट के बीच दरभंगा में देसी जुगाड़, मूर्तिकार अब बना रहे ड्रम वाले मिट्टी के चूल्हे
गैस सिलेंडर की कमी के कारण दरभंगा में होटल और रेस्टोरेंट संचालक अब मिट्टी के बड़े चूल्हों का सहारा ले रहे हैं। कुम्हार ड्रम में मिट्टी के चूल्हे बनाकर 4000 से 5000 रुपये में बेच रहे हैं।
खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब भारत में भी देखने को मिल रहा है। इसका सीधा प्रभाव घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पर पड़ा है। गैस की कमी के कारण कई जगहों पर होटल और रेस्टोरेंट चलाना मुश्किल हो गया है। बिहार के दरभंगा जिले में स्थिति ऐसी हो गई है कि कुछ होटल और रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं। इस संकट के बीच स्थानीय कुम्हार अब मूर्तियां बनाने के बजाय मिट्टी के बड़े-बड़े चूल्हे तैयार कर रहे हैं। इन चूल्हों को मोबिल ऑयल के बड़े ड्रम में बनाया जा रहा है और इनकी कीमत लगभग 4000 से 5000 रुपये तक बताई जा रही है।
होटल संचालक कर रहे हैं वैकल्पिक व्यवस्था
दरभंगा में होटल और रेस्टोरेंट संचालक अपने व्यवसाय को बचाने के लिए अब इन मिट्टी के चूल्हों का सहारा ले रहे हैं। वे ऑर्डर देकर ड्रम वाले चूल्हे बनवा रहे हैं ताकि कोयला या लकड़ी से खाना बनाया जा सके। जानकारी के अनुसार दरभंगा में रेस्टोरेंट, होटल व्यवसाय और स्कूलों में मिड-डे मील के लिए इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति लगभग पूरी तरह बंद हो गई है। इस वजह से कई होटल संचालकों को अपने मेन्यू में भी कटौती करनी पड़ी है।
होटल मालिकों की बढ़ी चिंता
रेस्टोरेंट संचालक प्रदीप गुप्ता का कहना है कि कमर्शियल सिलेंडर मिलना पूरी तरह बंद हो गया है। ऐसे में होटल चलाना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से भी कमर्शियल सिलेंडर को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने से परेशानी और बढ़ गई है। इसी कारण जब उन्हें पता चला कि कुम्हार ड्रम में बड़े मिट्टी के चूल्हे बना रहे हैं, तो उन्होंने भी एक चूल्हा देखने के लिए जाकर ऑर्डर दे दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 4500 रुपये में एक चूल्हे का ऑर्डर दिया है।
कुम्हारों को मिला नया काम
कुम्हार शंभू पंडित ने बताया कि गैस सिलेंडर की कमी को देखते हुए उन्हें यह विचार आया। उन्होंने एक पुराने ड्रम को कटवाकर उसमें मिट्टी से चूल्हा तैयार किया। पहला चूल्हा एक रेस्टोरेंट संचालक ने 5000 रुपये में खरीद लिया। इसके बाद लगातार लोग ऑर्डर देने आने लगे। उन्होंने बताया कि एक बड़ा चूल्हा बनाने में लगभग 2500 से 2800 रुपये की लागत आती है, जबकि यह 4000 से 5000 रुपये के बीच आसानी से बिक जाता है। एक अन्य कुम्हार के अनुसार हर दिन तीन से चार होटल संचालक चूल्हे का ऑर्डर देने आ रहे हैं। जैसे-जैसे लोगों के गैस सिलेंडर खत्म हो रहे हैं, वैसे-वैसे वे कोयला या लकड़ी से चलने वाले मिट्टी के चूल्हों को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में खरीद रहे हैं।
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