अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान बन सकता है शांति वार्ता का मंच
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत के संकेत देने के बाद, पाकिस्तान अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के संभावित मेजबान के रूप में उभरा है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब शांति की उम्मीदें बढ़ती नजर आ रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की मेजबानी कर सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निमंत्रण का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में युद्ध को लेकर तनाव चरम पर था और अमेरिका लगातार अपनी बढ़त का दावा कर रहा था।
पाकिस्तान ने दिया बातचीत का प्रस्ताव
शहबाज शरीफ ने ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार है। उन्होंने इसे सम्मान की बात बताया और कहा कि उनका देश सार्थक और निर्णायक वार्ता को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगा। ट्रंप ने इस पोस्ट को अपने ‘ट्रुथ सोशल’ अकाउंट पर शेयर किया, जिससे साफ है कि अब बातचीत की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं।
कौन-कौन हो सकता है शामिल
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की ओर से कौन प्रतिनिधित्व करेगा, लेकिन मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ का नाम सामने आ रहा है। वहीं अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर पाकिस्तान जाकर ईरानी प्रतिनिधियों से मिल सकते हैं। इसके अलावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भी शामिल होने की संभावना है। यह बैठक इस्लामाबाद में हो सकती है।
पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका
शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से भी बातचीत की है। वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भी संपर्क बना हुआ है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अन्य देशों की भी नजर
पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की भी इस मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं। कतर ने भी शांति प्रयासों का समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो G7 देशों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
भारत की प्रतिक्रिया और राजनीतिक बयानबाजी
नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से फोन पर बात की और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। वहीं राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए इसे व्यक्तिगत नीति बताया।
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