लखनऊ विश्वविद्यालय में जियोकॉन-2026 का समापन, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी जियोकॉन-2026 का समापन हुआ, जहां वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा की।
लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “जियोकॉन-2026: भूविज्ञान और जलवायु परिवर्तन हेतु सतत पर्यावरण” का शनिवार को समापन हो गया। इस संगोष्ठी में देश के कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। दो दिनों तक चले इस कार्यक्रम में पृथ्वी विज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कुल आठ तकनीकी सत्रों में 54 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रतिभागियों ने 215 शोध पत्र और पोस्टर प्रस्तुत किए। इसके अलावा संगोष्ठी के दौरान 8 मुख्य व्याख्यान और 6 प्लेनरी व्याख्यान भी आयोजित किए गए।
अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए अहम होंगे अगले दो दशक
संगोष्ठी के दूसरे दिनअनिल भारद्वाज, जो भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला अहमदाबाद के निदेशक हैं, ने कहा कि आने वाले दो दशक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने चंद्रयान-1 से लेकर चंद्रयान-3 तक की यात्रा और उसके वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
पृथ्वी संरक्षण होना चाहिए विज्ञान का अंतिम उद्देश्य
अविनाश चंद्र पांडे, जो अंतर-विश्वविद्यालय त्वरक केंद्र नई दिल्ली के निदेशक हैं, ने कहा कि विश्वविद्यालय और शोध संस्थान लगातार पृथ्वी और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही वैज्ञानिक अलग-अलग क्षेत्रों में शोध करते हों, लेकिन ज्ञान और विज्ञान का अंतिम उद्देश्य पृथ्वी का संरक्षण और उसका संवर्धन होना चाहिए।
वैज्ञानिकों ने साझा किए शोध और अनुभव
समापन सत्र मेंराजेंद्र कुमार (भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण) ने भूवैज्ञानिक मानचित्रण और खनिज खोज में आधुनिक तकनीक की उपयोगिता पर जोर दिया।एम. जी. ठक्कर, निदेशक, बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, ने कहा कि अतीत के जलवायु परिवर्तनों को समझकर भविष्य की चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सकता है। इसके अलावा निलय खरे (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) ने महासागरीय संसाधनों के सतत उपयोग और तटीय पर्यावरण की सुरक्षा को जरूरी बताया। वहीं पंकज कुमार ने पृथ्वी विज्ञान में आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों और प्रयोगात्मक शोध के महत्व पर प्रकाश डाला।
पोस्टर सत्र और पुरस्कार वितरण
पोस्टर सत्र में देश के कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों के शोधार्थियों ने 65 शोध पत्र प्रस्तुत किए। इसमें शिवेंद्र द्विवेदी को पहला, विशेष गुप्ता को दूसरा और प्रीति को तीसरा स्थान मिला। वैभव सिंह को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
“आज सहेजें, कल पाएँ” अभियान की शुरुआत
संगोष्ठी के दौरान पर्यावरण संरक्षण के लिए “आज सहेजें, कल पाएँ – छोटे प्रयास, बड़ा प्रभाव” अभियान भी शुरू किया गया। इस अभियान के तहत स्वच्छ पर्यावरण, जल और ऊर्जा संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, ग्रीनहाउस गैसों में कमी और प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर सुनील सिंह, प्रो. उमा कांत शुक्ला, प्रो. संतोष कुमार सिंह, प्रो. ध्रुव सेन सिंह, डॉ. राजेश सिंह, डॉ. मनोज कुमार यादव और डॉ. विनीत कुमार सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। विभागाध्यक्ष और संगोष्ठी के संयोजक ध्रुवसेन सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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