ग्रेटर नोएडा में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त का खुलासा, अस्पताल संचालिका समेत कई गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में नवजात शिशु की बिक्री का चौंकाने वाला मामला। पुलिस ने मुख्य आरोपी और कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है, जांच जारी है।
ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में स्थित नवजीवन अस्पताल में नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे मामले में अस्पताल संचालिका, नर्स, टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है। बताया जा रहा है कि नवजात बच्ची को बेचने के लिए 2.60 लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।
अस्पताल स्टाफ की मिलीभगत से हुआ सौदा
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे मामले की मुख्य आरोपी अस्पताल संचालिका यशिका गर्ग है। उसके निर्देश पर ही अस्पताल के स्टाफ ने नवजात बच्ची को बेचने के लिए ग्राहक की तलाश शुरू की। इस काम में टेक्नीशियन रणजीत सिंह और सफाई कर्मचारी गजेंद्र भी शामिल थे। वहीं नर्स पुष्पा और उसके बॉयफ्रेंड ने ग्राहक तलाशने से लेकर डील फाइनल करने तक की अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
अस्पताल सील, जांच के लिए कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी अस्पताल के डिलीवरी रजिस्टर, मरीजों के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी। अस्पताल को सील कर दिया गया है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या पहले भी ऐसे मामले हुए हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि अस्पताल में लिंग परीक्षण जैसी अवैध गतिविधियां भी हो रही थीं।
नवजात की मां की तलाश जारी
इस मामले की सबसे अहम कड़ी नवजात बच्ची की असली मां है, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि बच्ची को जन्म देने वाली युवती की उम्र करीब 18 साल है। पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड और आसपास के लोगों से पूछताछ कर उसकी पहचान करने की कोशिश कर रही है।
रिकॉर्ड छिपाने की कोशिश, जांच में बढ़ी सख्ती
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जैसे ही संचालिका की गिरफ्तारी हुई, कुछ कर्मचारी रिकॉर्ड रूम को लॉक कर फरार हो गए। इससे जांच में शुरुआती दिक्कत आई, लेकिन अब कमेटी की निगरानी में रिकॉर्ड खोले जा रहे हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मिलकर हर साक्ष्य जुटा रहे हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने निजी अस्पतालों की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां लोगों को सुरक्षित इलाज की उम्मीद होती है, वहां इस तरह के गैरकानूनी काम बेहद चिंताजनक हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस पूरे नेटवर्क का सच सामने आ सके।
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