मुरादाबाद में इंसानियत की मिसाल, मुस्लिम समुदाय ने किया हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार

मुरादाबाद के अगवानपुर में मुस्लिम समुदाय ने एक हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कर इंसानियत की मिसाल पेश की। परिवार ने साथ नहीं दिया तो स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाई। इस घटना ने गंगा-जमुनी तहजीब और मानवता का सच्चा संदेश समाज को दिया।

Mar 26, 2026 - 11:21
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मुरादाबाद में इंसानियत की मिसाल, मुस्लिम समुदाय ने किया हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के अगवानपुर नगर पंचायत से इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की एक भावुक कहानी सामने आई है। यहां 76 वर्षीय तेजपाल सिंह के निधन के बाद उनके अपने सगे संबंधियों ने अंतिम संस्कार से मुंह मोड़ लिया, लेकिन स्थानीय मुस्लिम समुदाय और हिंदू युवाओं ने मिलकर उनकी अंतिम विदाई की। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब समाज में मानवीय मूल्यों के गिरने की बातें होती हैं। इस पहल ने गंगा-जमुनी तहजीब की एक नई मिसाल पेश की है और लोगों को इंसानियत का असली मतलब समझाया है।

परिवार ने छोड़ा साथ, आसिफ बना सहारा
तेजपाल सिंह मूल रूप से बिजनौर के रहने वाले थे और पेपर मिल में इलेक्ट्रिशियन के तौर पर काम करते थे। साल 1997 में एक हादसे के बाद वे दिव्यांग हो गए थे। इसके बाद उनके जीवन में मुश्किलें बढ़ती चली गईं। पारिवारिक विवाद के चलते पत्नी और इकलौती बेटी से उनका रिश्ता टूट गया और वे अकेले पड़ गए। ऐसे समय में आसिफ नाम के व्यक्ति और उनके परिवार ने उन्हें सहारा दिया। पिछले 15 वर्षों से आसिफ का परिवार बिना किसी स्वार्थ के उनके खाने-पीने और दवाइयों का ध्यान रख रहा था।

मौत के बाद भी अपनों ने नहीं दिया साथ
तेजपाल सिंह के निधन के बाद पुलिस ने उनकी पूर्व पत्नी और पैतृक गांव बिजनौर में सूचना दी। लेकिन उनकी पत्नी ने तलाक का हवाला देते हुए आने से इनकार कर दिया। ऐसे में अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पूरी तरह स्थानीय लोगों पर आ गई।

मुस्लिम समुदाय ने निभाया इंसानियत का फर्ज
अगवानपुर के मुस्लिम भाइयों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर अंतिम संस्कार की सभी सामग्री जुटाई। इसके बाद हिंदू रीति-रिवाज से उनकी अर्थी को कंधा दिया गया। श्मशान घाट की सुविधा न होने के बावजूद रामगंगा नदी के किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां एक युवक मोनू ने उन्हें मुखाग्नि दी। यह घटना बताती है कि इंसानियत धर्म से कहीं ऊपर होती है।

2011 से जुड़ा था आसिफ और तेजपाल का रिश्ता
तेजपाल और आसिफ का रिश्ता साल 2011 में शुरू हुआ था, जब तेजपाल ने अपना घर आसिफ को बेच दिया था। कुछ समय बाद वे फिर उसी घर में लौट आए और वहीं रहने की इच्छा जताई। उन्होंने अपनी आखिरी सांस भी उसी घर में लेने और वहीं से अंतिम यात्रा निकलने की बात कही थी। आसिफ ने बड़ी दिलदारी दिखाते हुए उन्हें रहने दिया और अपने परिवार को उनकी सेवा में लगा दिया।

छोटे बेटे अमान ने निभाई बड़ी जिम्मेदारी
आसिफ का 10 साल का बेटा अमान रोज तेजपाल के लिए खाना लेकर जाता था। जिस दिन वह खाना लेकर पहुंचा, दरवाजा नहीं खुला, तभी इस दुखद घटना का पता चला। इस परिवार का यह व्यवहार आज के समय में बहुत ही दुर्लभ और सराहनीय माना जा रहा है।

श्मशान घाट की कमी पर उठे सवाल
इस घटना के बीच अगवानपुर में श्मशान घाट की कमी का मुद्दा भी सामने आया है। स्थानीय लोगों और रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई कि इलाके में हिंदू समाज के लिए कोई व्यवस्थित श्मशान घाट नहीं है। अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को ऊबड़-खाबड़ जमीन पर क्रिया-कर्म करना पड़ा। लोगों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हैं, लेकिन श्मशान के लिए भूमि आवंटित नहीं हो रही। कई बार बजट आने के बावजूद वापस चला गया। अब लोगों ने प्रशासन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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Ashwani Tiwari अश्वनी तिवारी भारतीय पत्रकार, कंटेंट राइटर, एंकर और मीडिया प्रोफेशनल हैं। वे डिजिटल पत्रकारिता, ग्राउंड रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और न्यूज़ प्रोडक्शन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने Zee News, Suman TV और UP News Network जैसे मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। वे राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर आधारित डिजिटल कंटेंट और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा अश्वनी तिवारी का जन्म 4 फरवरी 1997 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सीएम एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज, भेलूपुर, वाराणसी से प्राप्त की। हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएं उन्होंने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से स्नातक (B.A.) की डिग्री प्राप्त की तथा आगे चलकर मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की पढ़ाई पूरी की। अश्वनी तिवारी ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत कंटेंट राइटिंग और डिजिटल मीडिया से की। उन्होंने 10 दिसंबर 2023 से 15 मार्च 2024 तक India Watch, लखनऊ में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल मीडिया कंटेंट पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 7 मई 2024 से 9 जुलाई 2024 तक Zee News, नोएडा में कंटेंट राइटर के रूप में इंटर्नशिप की। इस दौरान वे न्यूज़ स्क्रिप्ट, डिजिटल कंटेंट और मीडिया रिसर्च से जुड़े रहे। अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2025 तक उन्होंने Suman TV, हैदराबाद में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया। यहां उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित समाचार एवं डिजिटल कंटेंट तैयार किए। वर्तमान में UP News Network से सब एडिटर के रूप में जुड़े, जहां उन्होंने कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग का कार्य किया। इस दौरान वे ‘खरी खोटी’ नामक विशेष शो का भी हिस्सा रहे। उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग तथा वीडियो प्रस्तुति की। वर्तमान में अश्वनी तिवारी मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। अश्वनी तिवारी डिजिटल पत्रकारिता और न्यूज़ प्रोडक्शन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनकी विशेषज्ञता कंटेंट राइटिंग, एंकरिंग, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया आधारित न्यूज़ प्रस्तुति में मानी जाती है।