कौशांबी में ‘हत्या’ का आरोप निकला झूठा, जिंदा मिली महिला, पति जेल से छूटने की उम्मीद
कौशांबी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां हत्या के आरोप के बाद एक महिला दिल्ली में जीवित पाई गई। पुलिस ने परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस महिला की हत्या का आरोप लगाकर उसके पति को जेल भेज दिया गया था, वह महिला जिंदा दिल्ली में अपने मौसेरे भाई के साथ मिली है। इस खुलासे के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने अब मायके पक्ष के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक निर्दोष व्यक्ति के जेल जाने की सच्चाई भी सामने लाई है। फिलहाल पुलिस महिला का बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई में जुटी है।
शादी के बाद से ही चल रहा था विवाद
यह मामला महेवाघाट थाना क्षेत्र के अलवारा गांव का है। पीड़ित ससुर योगेंद्र तिवारी के अनुसार, उन्होंने अपने बेटे राजू तिवारी की शादी साल 2016 में टेवां गांव निवासी शारदा मिश्रा की बेटी अंकिता तिवारी से की थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही अंकिता का व्यवहार ठीक नहीं था और वह अक्सर मायके में ही रहती थी। साल 2024 में वह अपने मौसेरे भाई रामू उर्फ संकल्प मिश्रा के साथ दिल्ली चली गई थी, हालांकि बाद में समझौता कर मामला शांत करा दिया गया था।
जेवर और नकदी लेकर हुई थी गायब
योगेंद्र तिवारी ने बताया कि 21 जनवरी 2026 को अंकिता एक बार फिर घर से जेवर और नकदी लेकर गायब हो गई। इसके बाद 22 जनवरी को उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई। लेकिन 20 फरवरी को मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर हत्या कर शव गायब करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मामले में बढ़ते दबाव के कारण राजू तिवारी ने 27 फरवरी को कोर्ट में सरेंडर कर दिया और तब से वह जेल में बंद है।
दिल्ली में मौसेरे भाई के साथ मिली महिला
पुलिस जांच के दौरान अंकिता तिवारी को दिल्ली से उसके मौसेरे भाई के साथ बरामद कर लिया गया। इस खुलासे के बाद मामला पूरी तरह बदल गया। ससुर योगेंद्र तिवारी ने महिला के पिता, भाई और अन्य रिश्तेदारों पर साजिश रचने का आरोप लगाया और पुलिस को तहरीर दी।
मायके पक्ष पर कार्रवाई, दो गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में शारदा मिश्रा और उनके बेटे गोपाल मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह के अनुसार, मायके पक्ष ने सच्चाई छिपाकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया, जिससे एक निर्दोष व्यक्ति को जेल जाना पड़ा।
जांच जारी, न्याय की उम्मीद
फिलहाल महिला का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है और कोर्ट में उसका बयान दर्ज किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने समाज में झूठे आरोपों के गंभीर परिणामों को उजागर किया है।
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