इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद चर्चा में हरीश राणा का मामला, जानिए क्वाड्रिप्लेजिया क्या है और कैसे होता है

हरीश राणा के इच्छामृत्यु मामले के बारे में जानें, क्वाड्रिप्लेजिया क्या है, इसके कारण, प्रभाव और उपचार के बारे में सरल भाषा में जानें।

Mar 18, 2026 - 11:59
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इच्छामृत्यु की अनुमति के बाद चर्चा में हरीश राणा का मामला, जानिए क्वाड्रिप्लेजिया क्या है और कैसे होता है

देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के बाद हरीश राणा का मामला चर्चा में आ गया है। पिछले 13 सालों से वे वेजिटेटिव स्टेट में थे, यानी वह जीवित तो थे लेकिन उन्हें आसपास की कोई जानकारी नहीं होती थी। वह केवल दवाइयों और मशीनों के सहारे जीवन जी रहे थे। एम्स में उनका इलाज चल रहा था और अब धीरे-धीरे उनके लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाए जा रहे हैं। इस घटना के बाद लोगों के मन में उनकी बीमारी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

2013 में हादसे के बाद बिगड़ी हालत
जानकारी के मुताबिक, साल 2013 में हरीश राणा चंडीगढ़ में एक हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे के बाद उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई। उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी हो गई, जिसमें शरीर के कई हिस्से काम करना बंद कर देते हैं। इसी वजह से वह लंबे समय तक वेजिटेटिव स्टेट में रहे।

क्या है क्वाड्रिप्लेजिया बीमारी
गुरुग्राम के डॉक्टर डॉ. के अनुसार, क्वाड्रिप्लेजिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज के दोनों हाथ और दोनों पैर काम करना बंद कर देते हैं। यह समस्या अक्सर स्पाइनल कॉर्ड यानी रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से होती है। गर्दन के हिस्से से गुजरने वाली स्पाइनल कॉर्ड दिमाग के संकेत शरीर तक पहुंचाती है। जब इस पर चोट लगती है, तो शरीर के अंगों तक सिग्नल नहीं पहुंच पाते और वे काम करना बंद कर देते हैं।

किन कारणों से होती है यह समस्या
क्वाड्रिप्लेजिया कई कारणों से हो सकता है। जैसे ऊंचाई से गिरना, तेज रफ्तार में वाहन दुर्घटना, स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर या ब्लीडिंग, ज्यादा रेडिएशन या मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियां। इन सभी कारणों से स्पाइनल कॉर्ड को नुकसान पहुंचता है, जिससे शरीर की गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

शरीर पर पड़ता है गंभीर असर
इस बीमारी में मरीज चल-फिर नहीं सकता और अपने रोजमर्रा के काम भी नहीं कर पाता। हाथ-पैरों की संवेदना खत्म हो जाती है, जिससे चोट लगने का भी पता नहीं चलता। मरीज को पेशाब और मल त्याग का भी एहसास नहीं होता। लंबे समय तक एक ही जगह पड़े रहने से बेड सोर्स यानी घाव बनने का खतरा बढ़ जाता है।

इलाज संभव लेकिन पूरी तरह ठीक होना मुश्किल
क्वाड्रिप्लेजिया का इलाज मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में ऑपरेशन कर नसों पर दबाव कम किया जाता है, जिससे थोड़ी रिकवरी हो सकती है। फिजियोथेरेपी से भी सुधार संभव है। लेकिन अगर स्पाइनल कॉर्ड को स्थायी नुकसान हो गया हो, तो पूरी तरह ठीक होना मुश्किल हो जाता है।

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Aniket Prajapati अनिकेत प्रजापति UP News Network असिस्टेंट न्यूज़ एडिटर है। वे 1 साल से ज्योतिष और धार्मिक, बिजनेस, नेशनल, उत्तर प्रदेश, गैजेट्स, हेल्थ आदि से जुड़े मुद्दों को कवर कर रहे हैं। अनिकेत प्रजापति पिछले 1 साल से UP News Network, (Digital) के साथ जुड़े हैं। वह TV 24 Network में भी काम कर चुके हैं। अनिकेत प्रजापति ने भारतीय जनसंचार संस्थान University of Lucknow से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है।