टोको, रोको, नहीं माने तो ठोको… वाराणसी में चतुरंगिणी सेना का ऐलान, अविमुक्तेश्वरानंद बने सुप्रीम कमांडर
वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना के गठन की घोषणा की है। इसका उद्देश्य गऊ, गंगा और मंदिरों की रक्षा करना है। देश के 800 गांवों में इसके सैनिक होंगे। सेना में चार मुख्य अंग और 20 विभाग होंगे, जिनका गठन जल्द पूरा किया जाएगा।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सोमवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चतुरंगिणी सेना के गठन का ऐलान किया। इस सेना का उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा करना है। इसके तहत देश के लगभग 800 गांवों में सैनिक तैयार किए जाएंगे, जो गऊ, गंगा और मंदिरों की रक्षा के लिए समर्पित रहेंगे। यह घोषणा वाराणसी के विद्या मठ में पंचमी तिथि के अभिजीत मुहूर्त में की गई, जहां बड़ी संख्या में साधु-संत और अनुयायी मौजूद रहे।
27 कमांडरों को दी जिम्मेदारी, अगले साल तक पूरा गठन
शंकराचार्य ने इस मौके पर अपने 27 कमांडरों को भी मीडिया के सामने पेश किया। उन्होंने इन सभी को निर्देश दिया कि अगले साल मौनी अमावस्या तक चतुरंगिणी सेना का पूरा गठन कर लिया जाए। यह सेना एक अक्षौहिणी के रूप में होगी, जिसमें लगभग 2,18,700 सैनिक शामिल होंगे।
टोको, रोको और ठोको का मतलब समझाया
शंकराचार्य ने सेना के काम करने का तरीका भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पहले गलत काम करने वालों को टोका जाएगा, फिर रोका जाएगा और अगर वे नहीं मानते हैं तो ‘ठोका’ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां ‘ठोकने’ का मतलब कानूनी कार्रवाई यानी मुकदमा दर्ज कराने से है।
चार प्रमुख अंगों में होगा संगठन का ढांचा
चतुरंगिणी सेना को चार मुख्य भागों में बांटा गया है—मनबल, तनबल, धनबल और जनबल। मनबल में विद्वान, वकील, मीडिया और पुरोहित शामिल होंगे, जिसकी जिम्मेदारी महामंडलेश्वर अमरेश्वरानंद को दी गई है। तनबल में शारीरिक प्रशिक्षण देने वाले लोग होंगे, जिन्हें लाठी, तलवार और अन्य हथियारों का प्रशिक्षण कानून के दायरे में दिया जाएगा, इसके प्रमुख ब्रह्मचारी शंभू प्रेमानंद होंगे।
धन और जनशक्ति से मजबूत होगा संगठन
धनबल शाखा संगठन के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने का काम करेगी, जिसकी जिम्मेदारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद को सौंपी गई है। वहीं जनबल शाखा के जरिए लोगों को अलग-अलग स्तर पर जोड़ा जाएगा, जिसका नेतृत्व महामंडलेश्वर शिवम जी महाराज करेंगे।
20 विभाग और तय होगी पूरी संरचना
चतुरंगिणी सेना में इन चार अंगों के अलावा 20 विभाग भी होंगे। संगठन में अलग-अलग पद जैसे पत्तिपाल, सेनामुखपति, गुल्मपति, गणपाल, वाहिनीपति, पृतनापति, चमुपति, अनीकिनीपति और महासेनापति बनाए जाएंगे। इन पदों पर नियुक्तियां मौनी अमावस्या तक तय कर दी जाएंगी। इस घोषणा के बाद पूरे क्षेत्र में इस नई पहल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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