300 साल पुरानी हवेली बनी गौरैयों का सुरक्षित घर, ‘गौरैया वाली हवेली’ के नाम से मशहूर
बिजनौर की 300 साल पुरानी हवेली 2500 गौरैयों के लिए एक सुरक्षित घर बन गई है, जो एक अनूठे संरक्षण प्रयास का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्यौहारा क्षेत्र में स्थित करीब 300 साल पुरानी शेखों की हवेली आज एक खास पहचान बना चुकी है। यह हवेली अब इंसानों से ज्यादा परिंदों के लिए जानी जाती है और ‘गौरैया वाली हवेली’ के नाम से मशहूर हो गई है। यहां करीब ढाई हजार गौरैया ने अपना बसेरा बना रखा है। ऐसे समय में जब गौरैया विलुप्त होने के कगार पर हैं, यह हवेली उनके लिए सुरक्षित ठिकाना बनकर सामने आई है।
विरासत में मिली परिंदों की जिम्मेदारी
इस हवेली के मालिक रहे मरहूम अकबर शेख ने अपने बेटे जमाल शेख को यह हवेली सौंपी। साथ ही हजारों गौरैयों की देखभाल की जिम्मेदारी भी दी। परिवार में पीढ़ियों से जानवरों और पक्षियों के प्रति विशेष लगाव रहा है, जिसे आज भी पूरी ईमानदारी से निभाया जा रहा है।
परिवार मिलकर करता है देखभाल
आज इस हवेली में फराज शेख, नौमान शेख और अफसर चौधरी मिलकर गौरैयों की देखभाल करते हैं। परिवार ने अपनी दिनचर्या इस तरह तय की है कि घर में हमेशा कोई न कोई सदस्य मौजूद रहे, ताकि चिड़ियों को समय पर दाना और पानी मिल सके।
मौसम के अनुसार मिलती है सुविधा
परिवार गौरैयों के खान-पान का विशेष ध्यान रखता है। मौसम के अनुसार उन्हें उपयुक्त दाना-पानी दिया जाता है। यही कारण है कि यहां हजारों गौरैया सुरक्षित माहौल में रह रही हैं और उनकी संख्या भी स्थिर बनी हुई है।
हवेली की संरचना भी अनुकूल
हवेली के पुराने ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आंगन में तेज रोशनी नहीं होती और शोर-शराबे से बचा जाता है। छत पर लोगों की आवाजाही सीमित रखी जाती है। साथ ही झाड़ियां, घास और तिनकों की व्यवस्था इस तरह की गई है कि गौरैया आसानी से अपने घोंसले बना सकें।
गौरैया दिवस पर खास आयोजन
हर साल गौरैया दिवस के मौके पर यहां विशेष कार्यक्रम होता है। स्थानीय लोग शाम को चिड़ियों की चहचहाहट सुनने के लिए इकट्ठा होते हैं। इस दिन केक काटकर गौरैयों का ‘जन्मदिन’ मनाया जाता है और केक का हिस्सा चिड़ियों के लिए भी रखा जाता है।
नहीं बेचेंगे हवेली, संरक्षण रहेगा जारी
परिवार का कहना है कि यह हवेली उनके बुजुर्गों की अमानत है। वे इसे कभी नहीं बेचेंगे और न ही गौरैयों का यह आशियाना उजड़ने देंगे। साथ ही उन्होंने सरकार से सहयोग की अपील की है, ताकि इस संरक्षण कार्य को और आगे बढ़ाया जा सके।
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