श्रावस्ती में शिया समुदाय का बड़ा फैसला, इस बार सादगी से मनाई जाएगी ईद-उल-फितर
श्रावस्ती में शिया समुदाय ने अपने धार्मिक नेता की मृत्यु के बाद ईद-उल-फितर को सादगी और मातम के साथ मनाने का फैसला किया है।
श्रावस्ती जिले के नासिरगंज क्षेत्र से एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक खबर सामने आई है। यहां शिया समुदाय ने इस वर्ष ईद-उल-फितर को पारंपरिक रूप से न मनाने का फैसला लिया है। समुदाय के लोगों ने घोषणा की है कि इस बार न तो कोई जश्न होगा और न ही खुशियां मनाई जाएंगी। इसके बजाय लोग सादगी के साथ नमाज अदा करेंगे और अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर शोक व्यक्त करेंगे।
अलविदा जुमे की नमाज में लिया गया फैसला
इस निर्णय की घोषणा अलविदा जुमे की नमाज के दौरान की गई। नमाज में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर यह फैसला लिया। समुदाय के लोगों का कहना है कि मौजूदा हालात और अपने धार्मिक नेता के निधन के चलते इस बार उत्सव मनाना उचित नहीं है।
रहबर की मौत से गहरे शोक में लोग
शिया समुदाय के अनुसार, उनके सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली सिस्तानी की मौत के बाद पूरी दुनिया का शिया समाज शोक में डूबा हुआ है। इसी कारण श्रावस्ती के लोगों ने भी ईद को सादगी और दुख के साथ मनाने का निर्णय लिया है।
इमाम मौलाना तुफैल अब्बास का बयान
नासिरगंज की शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना तुफैल अब्बास ने कहा कि अयातुल्ला अली सिस्तानी केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि पूरे समुदाय के रहबर और मार्गदर्शक थे। उनकी मृत्यु को अपूरणीय क्षति बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जश्न मनाना उचित नहीं है।
अन्य लोगों ने भी जताया दुख
नाजिम हैदर ने कहा कि जैसे हिंदू धर्म में शंकराचार्य और ईसाई धर्म में पोप का महत्व होता है, उसी तरह शिया समुदाय के लिए रहबर का बहुत बड़ा स्थान होता है। उनकी मौत से सभी लोग आहत हैं। वहीं वकार हैदर ने कहा कि जब दुनिया में मासूमों की जान जा रही है और हमारे रहबर अब हमारे बीच नहीं हैं, तो खुशियां मनाना संभव नहीं है।
सादगी से अदा होगी ईद की नमाज
समुदाय के लोगों ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष ईद-उल-फितर की नमाज पूरी सादगी के साथ अदा की जाएगी। किसी भी प्रकार का उत्सव, मिठाई वितरण या जश्न नहीं होगा। लोग काली पट्टी बांधकर शोक व्यक्त करेंगे और अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करेंगे।
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