एम्स में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू, हरीश राणा के जीवन के अंतिम चरण पर देश की नजर
हरीश राणा के निष्क्रिय इच्छामृत्यु मामले, एम्स में उनके इलाज, चिकित्सा प्रक्रिया और परिवार के फैसले के बारे में पूरी जानकारी सरल हिंदी समाचार में जानें।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा इस समय एम्स में अपने जीवन के अंतिम क्षण गुजार रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद उन्हें पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती किया गया है। यहां डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनके जीवन रक्षक उपकरण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले के बाद पूरे देश में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कृत्रिम पोषण और पानी की सप्लाई बंद
एम्स में हरीश राणा को दिए जाने वाले कृत्रिम पोषण को बंद कर दिया गया है। उनके पेट में लगी फीडिंग ट्यूब की कैप बंद कर दी गई है, हालांकि ट्यूब को अभी हटाया नहीं गया है। इसके साथ ही मंगलवार से उन्हें पानी देना भी बंद कर दिया गया है। यह फैसला मेडिकल बोर्ड की बैठक के बाद लिया गया। अब हरीश का शरीर पहले से मौजूद हाइड्रेशन के सहारे ही काम कर रहा है। डॉक्टर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें किसी प्रकार का दर्द न हो।
13 साल पहले हादसे के बाद कोमा में गए थे
हरीश राणा 20 अगस्त 2013 को चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान एक पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट लगी और वह कोमा में चले गए। इसके बाद वह कभी होश में नहीं आ पाए। पिछले 13 सालों से उन्हें ट्यूब के जरिए पोषण दिया जा रहा था और वह मशीनों के सहारे ही जीवित थे।
मानवीय आधार पर परिवार को साथ रहने की अनुमति
एम्स प्रशासन ने मानवीय पहल करते हुए हरीश के माता-पिता निर्मला देवी और अशोक राणा को पैलिएटिव केयर सेंटर में रहने की अनुमति दी है, ताकि वे अपने बेटे के अंतिम समय में उसके साथ रह सकें। अस्पताल प्रबंधन इस पूरी प्रक्रिया को सम्मानजनक और दर्दरहित बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
अंगदान की इच्छा, लेकिन संभावना कम
हरीश के माता-पिता ने उनके अंगदान का संकल्प लिया है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि हरीश पूरी तरह ब्रेन डेड नहीं हैं। पोषण और पानी बंद होने के बाद धीरे-धीरे उनके शरीर के अंग जैसे किडनी, लिवर, फेफड़े और हृदय काम करना बंद कर देंगे। ऐसे में अंगदान की संभावना बहुत कम है, लेकिन मृत्यु के बाद नेत्रदान संभव हो सकता है।
पैलिएटिव केयर में लगातार निगरानी
एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, पैलिएटिव केयर यूनिट में हरीश की लगातार निगरानी की जा रही है। यहां छह बेड की सुविधा है और मेडिकल टीम हर समय उनकी स्थिति का मूल्यांकन कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इच्छामृत्यु की प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसका सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इस दौरान उन्हें केवल सपोर्टिव केयर दी जाएगी, कोई सक्रिय इलाज नहीं किया जाएगा।
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