गोद लिया बच्चा 10 महीने बाद लौटाना पड़ा, गाजियाबाद का भावुक मामला चर्चा में
गाजियाबाद का एक भावुक मामला सामने आया है, जहां जैविक माता-पिता के मिल जाने के बाद एक एकल मां ने गोद लिए बच्चे को लौटा दिया।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के विजयनगर क्षेत्र से एक बेहद भावुक और जटिल मामला सामने आया है। यहां एक सिंगल मदर ने जिस बच्चे को बाल आश्रम से गोद लेकर अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया था, उसे करीब 10 महीने बाद वापस करना पड़ा। यह फैसला तब लिया गया जब बच्चे के असली माता-पिता सामने आए। अब कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्चे को उसके जैविक परिवार को सौंपने की तैयारी चल रही है। इस घटना ने लोगों को भावुक कर दिया है।
कैसे मिला था बच्चा और हुआ गोद लेना
जानकारी के अनुसार, साल 2024 में यह बच्चा अपने माता-पिता से बिछड़कर विजयनगर इलाके में मिला था। पुलिस ने काफी तलाश की, लेकिन उसके परिवार का कोई पता नहीं चल सका। इसके बाद बच्चे को बाल आश्रम भेज दिया गया। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जून 2025 में एक सिंगल मदर ने उसे गोद लिया। धीरे-धीरे महिला और बच्चे के बीच गहरा रिश्ता बन गया और दोनों एक-दूसरे के साथ नई जिंदगी जीने लगे।
असली माता-पिता की तलाश और पहचान
बच्चे के असली माता-पिता उसे ढूंढने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। इसी दौरान वे नेपाल चले गए और वहां भारतीय दूतावास से मदद मांगी। अक्टूबर 2025 में वे भारत लौटे और विजयनगर थाने पहुंचकर बच्चे को पहचानने का दावा किया। सबसे भावुक पल तब आया जब बच्चे ने भी अपने पिता को पहचान लिया, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
सिंगल मदर ने भारी मन से लौटाया बच्चा
घरौदा बाल आश्रम के संस्थापक ओंकार सिंह के अनुसार, 16 फरवरी को गोद लेने वाली महिला ने भारी मन से बच्चे को वापस आश्रम को सौंप दिया। करीब 10 महीने तक साथ रहने के बाद यह अलगाव बहुत ही दर्दनाक रहा। महिला ने बच्चे के साथ एक नई शुरुआत की थी, लेकिन हालात ने उसे यह कठिन फैसला लेने पर मजबूर कर दिया।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
अब बच्चे को उसके असली माता-पिता को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। जरूरत पड़ने पर डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा। चूंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय है, इसलिए नेपाल एंबेसी की मौजूदगी में ही बच्चे को सौंपा जाएगा। अंतिम निर्णय जिला प्रशासन के आदेश के बाद लिया जाएगा।
पांच महीने चली कानूनी प्रक्रिया
इस पूरे मामले में पिछले पांच महीनों से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के निर्देश पर बच्चे को दोबारा आश्रम बुलाया गया। अब सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बच्चे को उसके असली माता-पिता को सौंप दिया जाएगा।
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