राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से अपराह्न तीन बजे उनके आवास पर भेंट की।

लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रदेश भाजपा संगठन को सबसे मजबूत बताकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह ने प्रदेश में सत्ता और संगठन में बड़े सियासी बदलाव की अटकलों को तो खारिज किया, लेकिन मंत्रिमंडल में विस्तार के संकेत जरूर दिए।

 रविवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से राजभवन में मुलाकात के बाद राधामोहन ने शनिवार शाम से इंटरनेट मीडिया पर चल रही चर्चाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की। 

 राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से उनका पुराना परिचय

राज्यपाल से अचानक मुलाकात पर कहा कि उन्हें प्रदेश प्रभारी बने करीब छह माह हो गए हैं, लेकिन अब तक मुलाकात नहीं हो सकी थी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से उनका पुराना परिचय है, इसलिए शिष्टाचार के नाते उनसे मिलने के लिए वह आए हैं।

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार और संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह ने कहा कि कुछ लोग अपने दिमाग में अपनी खेती बोते और काटते हैं। इस बारे में कोई क्या कहे। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में हमारी अच्छी जीत हुई है। अब जिला पंचायत अध्यक्ष चुनावों की तैयारी है। कोरोना पीड़ितों के लिए संगठन बेहतर सेवा कार्य कर रहा है।

मंत्री बनाना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार

 योगी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल का संकेत देते हुए राधामोहन सिंह ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का ही विशेष अधिकार है कि किसे, कब मंत्री बनाया जाए? उनका कहना था कि मंत्रिमंडल में कुछ सीटें खाली हैं लेकिन इस बारे में मुख्यमंत्री को फैसला करना है कि क्या किया जाए? उन्होंने कोरोना महामारी में आपदा प्रबंधन से लेकर कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर योगी सरकार को सराहा।

साहित्य और इतिहास पर चर्चा 

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी राधामोहन सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से अपराह्न तीन बजे उनके आवास पर भेंट की। आधा घंटा से अधिक चली मुलाकात के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि राजनीतिक मामलों के बजाए साहित्य व इतिहास पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि राधामोहन सिंह से उनकी आत्मीयता पुरानी है और इस मुलाकात के राजनीतिक निहितार्थ नहीं निकाले जाने चाहिए।

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