पुलिस एनकाउंटर में मारे गए विकास दुबे के 13 बीघे खेत पर कब्जे की कोशिश की गई। आईजी से शिकायत पर जांच में आरोप सही मिले और शुक्रवार को पुलिस की मौजूदगी में विकास की पत्नी रिचा को कब्जा वापस मिला।

कानपुर(Uttar Pradesh). पुलिस एनकाउंटर में मारे गए विकास दुबे के 13 बीघे खेत पर कब्जे की कोशिश की गई। आईजी से शिकायत पर जांच में आरोप सही मिले और शुक्रवार को पुलिस की मौजूदगी में विकास की पत्नी रिचा को कब्जा वापस मिला। रिचा ने अपने सामने खेत की जुताई कराई। स्थानीय पुलिस बल भी तैनात रहा। कब्जा करने का प्रयास करने वालों को हिदायत दी गई है।

रिचा दुबे के वकील अनुराग शुक्ला के मुताबिक सकरवां गांव के शशिकांत द्विवेदी से विकास दुबे ने 2016 में करीब 13 बीघा खेत खरीदे थे। जिसके बाद से विकास ही उस पर खेती करवाता था। बिकरू कांड में जब विकास दुबे मार दिया गया तो इस बीच कुछ लोगों ने इसका फायदा उठाने का प्रयास किया। आरोप है कि सात जून को जब उनके बटाईदार विपिन, आनंद अवस्थी खेत में जुताई करने पहुंचे तो गांव निवासी श्रीकांत दीक्षित और प्रधान ने इसका विरोध किया। 

आईजी के निर्देश पर पुलिस ने दिलवाया विकास की पत्नी को कब्जा 

इन सभी ने वहां पर कब्जा जमाने का प्रयास किया। जिसकी शिकायत आईजी रेंज मोहित अग्रवाल से की गई। पूरे मामले की जांच हुई जिसमें पता चला कि खेत विकास के ही हैं। लिहाजा स्थानीय पुलिस को निर्देशित किया गया कि खेत मालिक के परिजनों को वहां पर कब्जा दिलाएं। इसलिए रिचा दुबे अपने वकील के साथ शुक्रवार को मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। खेत की जुताई की गई। इस दौरान गांव निवासी हीरा बाजपेई पहुंचे उन्होंने बताया कि इसमें से तीन बीघा खेत उनका है। मगर पुलिस के पास सभी दस्तावेज मौजूद थे। जिससे स्पष्ट हुआ कि हीरा की जमीन नहीं है। इसलिए पुलिस ने सख्ती कर उनको वापस भेज दिया। ककवन एसओ संतोष ओझा ने बताया कि नियमानुसार दस्तावेजों के आधार पर पूरी कार्रवाई की गई है।

ट्यूबवेल की बिजली जुड़वाने पहुंची

विकास के मारे जाने के बाद से बिजली विभाग ने उसके खेत में लगे ट्यूबवेल की बिजली काट दी थी जो अब तक नहीं जोड़ी गई। इसलिए रिचा शिवली स्थित पावर जेई से मिलने पहुंची लेकिन वो नहीं मिले जिसके बाद वापस बिकरू गई। यहां पर अपने सास-ससुर से मिली। कुछ देर बाद वापस चली गई।