हवलदार शहीद पिंकू कुमार का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके पैतृक गांव लुहारी लाया गया। पिंकू की शहादत से आस पास के कई गांवों में होली की खुशियां मातम में बदल गईं।

बागपत(Uttar Pradesh). दक्षिण कश्मीर में शोपियां इलाके के वनगाम में आतंकियों से लोहा लेते हुए शनिवार रात शहीद हुए बागपत के लुहारी गांव के लाल पिंकू कुमार का पार्थिव शरीर सोमवार को गांव में पहुंचा। हजारों की संख्या में लोग वीर सपूत के अंतिम दर्शन को गांव में पहुंच गए। शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान पूरा वातावरण भारत माता के जयकारों से गूंजता रहा। वहीं गांव में दुल्हैंडी का त्योहार नहीं मनाया गया। यमुना किनारे गार्ड ऑफ ऑनर और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद को मुखाग्नि उनके 15 साल के भतीजे ने दी।

परिवार का कहना है बेटे की शहादत पर परिवार में गम है, लेकिन उनको इस बात का गर्व भी है कि उनका बेटा अपनी अंतिम सांस तक भारत माता की सेवा करता रहा। वो देश की रक्षा के लिए आतंकियों से लोहा लेता रहा और अपने प्राणों की आहूति दी। शहीद की दोनों बेटियों ने कहा कि वे भी अपने पापा की तरह देश की रक्षा करने के लिए सेना में जाएंगी। श्रद्धांजलि देने वालों में जिलाधिकारी राजकमल यादव, पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह के अलावा भाजपा सांसद डाक्टर सत्यपाल सिंह, विधायक समेत कई जनप्रतिनिधि भी शामिल थे।

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आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए थे पिंकू कुमार 

बागपत के बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के लुहारी गांव के रहने वाले पिंकू कुमार का जन्‍म 1983 में हुआ था। 13 सितंबर 2001 में वे सेना के 6-जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। 2005 में उनकी शादी मुजफ्फरनगर के सोरम गोयला गांव की रहने वाली कविता से हुई थी। परिवार में पिता जबर सिंह, मां कमलेश देवी, भाई मनोज के अलावा पत्नी कविता, 10 साल की बेटी शैली, 8 साल की बेटी अंजलि और 8 महीने का बेटा अर्णव भी है। सेना ने अफसरों ने बताया कि शनिवार रात दक्षिण कश्मीर के वानगाम शोपियां में जवानों ने एक ऑपरेशन में दो आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। इसमें पिंकू कुमार शहीद हो गए थे, जबकि दो जवान घायल भी हुए थे।

अंतिम दर्शन को उमड़ी लोगों की भीड़ 

शनिवार रात की परिजनों को पिंकू के शहादत की खबर मिली थी। तब से उनके घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। पिंकू के परिजनों और गांव वालों को उनकी शहादत पर गर्व है। उधर, शहीद की दोनों बेटियां भी पिता की शहादत पर गर्व करते हुए देश की रक्षा की बात कह रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपए की आर्थिक मदद व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। साथ ही जनपद की एक सड़क का नामकरण भी शहीद के नाम पर किया जाएगा।

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