उत्तर प्रदेश के रॉबर्टगंज में रहने वाली साक्षी (IAS Sakshi) वर्ष 2018 के बैच में IAS बनीं। उनके पिताजी का नाम कृष्ण कुमार गर्ग है और वे एक बिजनेसमैन हैं। इनकी माँ रेनु गर्ग एक गृहिणी हैं। साक्षी कहती हैं कि उनके पिता जी IAS बनना चाहते थे, परन्तु कुछ कारणों से उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।

करियर डेस्क. कहते हैं बिन चिराग के जो घर को रोशन करती हैं वो बेटियां होती हैं...किसी साहित्यकार द्वारा बोली गयी ये लाइनें सही भी साबित हो जाती हैं। देश की ऐसी बहुत सी बेटियां हैं जिन्होंने न सिर्फ अपना बल्कि अपने परिवार या यूं कहें की पूरे देश का नाम रोशन किया है। ऐसी ही एक बेटी की कहानी आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं 2018 बैच की IAS आफिसर साक्षी की। जिन्होंने ख़ूब मेहनत से पढ़ाई की और आईएएस अधिकारी बनकर अपने पिता के सपने को साकार किया।

उत्तर प्रदेश के रॉबर्टगंज में रहने वाली साक्षी (IAS Sakshi) वर्ष 2018 के बैच में IAS बनीं। उनके पिताजी का नाम कृष्ण कुमार गर्ग है और वे एक बिजनेसमैन हैं। इनकी माँ रेनु गर्ग एक गृहिणी हैं। साक्षी कहती हैं कि उनके पिता जी IAS बनना चाहते थे, परन्तु कुछ कारणों से उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। अतः उन्होंने हमेशा से ही साक्षी को मानसिक तौर पर भी यूपीएससी का एग्जाम देने के लिए के लिए तैयार किया और उनका बहुत साथ भी दिया।

गवर्नमेंट कालेज से किया BA 

वे अपने बारे में बताते हुए कहती हैं कि शुरुआत से ही उनका मन पढ़ाई में काफी लगता था। उन्होंने ग्रेजुएशन तक तो राबर्ट्सगंज रहकर ही शिक्षा प्राप्त की है। साक्षी पढ़ने में काफ़ी अच्छी थीं, उन्होंने 10 वीं की परीक्षा में 76 प्रतिशत तथा 12वीं में 81.4 प्रतिशत नम्बर प्राप्त किए थे। फिर राजकीय महिला महाविद्यालय से इन्होंने B.A की पढ़ाई पूरी की।

12वीं में ही बनाया लक्ष्य सिविल सर्विस का एग्जाम क्रैक करना है 

12 वीं की परीक्षा देने के पश्चात साक्षी ने तय कर लिया था कि उन्हें यूपीएससी की तैयारी करनी है। फिर वह अच्छे अंको से पास हुई तो उनका निश्चय और दृढ़ हो गया था, परंतु उस समय राबर्ट्सगंज में किसी भी कंपटीशन एग्जाम की तैयारी करने के लिए उचित साधन उपलब्ध नहीं थे, अतः साक्षी ने तय किया कि वह अपने ग्रेजुएशन पूरी होने के बाद ही UPSC की तैयारी शुरू करेंगी।

पूरा किया अपने पिता का सपना

साक्षी बताती हैं कि ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने निश्चय किया कि वे दिल्ली जाकर यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करेंगी। जब उन्होंने इस बारे में अपने पिता जी से कहा कि वे दिल्ली जाकर पढ़ना जाती है और यूपीएससी की परीक्षा देखकर आईएएस ऑफिसर बनना चाहती है तो उनके पिताजी बहुत खुश है क्योंकि वे स्वयं आईएएस ऑफिसर बनने का सपना देखते थे। साक्षी के पिता जी ने उनका बहुत साथ दिया। साक्षी के पिता बताते हैं कि वे बहुत खुश हैं कि उनकी बेटी आईएएस ऑफिसर बन गई है क्योंकि जो सपना उन्होंने देखा था, उस अधूरे सपने को उनकी बेटी ने साकार किया है। देश की इस बेटी पर हम सभी को नाज़ है।

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